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राजा और गिलहरी

 

किसी देश में एक राजा राज्य करता था । वह बहुत विद्वान, शक्तिशाली तथा सुन्दर था । किंतु वह घमंडी बहुत था । अपने बराबर किसी को समझता नहीं था ।

एक दिन उसने अपने मंत्री से कहा कि इस राज्य में ऐसा कोई नहीं है जो मेरी बराबरी कर सके तथा मेरे सामने डींग हाँक सके ।

राजा का मंत्री प्रायः राजा की हाँ में हाँ मिलाया करता था, यह सुनकर कप रहा ।

राजा बड़ा हैरान हुआ। उसने पूछा - मंत्री, पर आप कप क्यों हैं ? मंत्री ने मुस्करा कर कहा कि राजन आप सत्य सुनना चाहते हैं, तो सुनें। मैं यह विश्वास से नहीं कह सकता कि कोई भी कभी आपके सामने डींग नहीं हाँकेगा।

इसलिए हो सकता है कि कभी कोई व्यक्ति आपके सामने अपनी शेखी बघारे तो आप उसे क्षमा कर दें ।

यह बात हो ही रही थी कि एक गिलहरी सामने से आ गई । उसके पंजे में एक सोने की मोहर थी। राजा यह देखकर हँसने लगा। यह देखकर गिलहरी ने राजा से कहा कि तुम मेरी सोने की मोहर छीनना चाहते हो । यह सुनकर राजा को बड़ा क्रोध आया । वह गिलहरी की ओर लपका। गिलहरी दम दबा कर  भागी, मगर उसकी सोने की मोहर नीचे गिर गई । राजा ने मंत्री के सामने मोहर उठाकर अपने पास रख ली ।

सन्ध्या के समय राजा और मंत्री अपने पड़ोसी देश के राजदूतों से किसी विषय पर सलाह कर रहे थे । अचानक गिलहरी आई और चिल्लाने लगी मेरे धन के बल पर राजा इतराता है ।

राजा यह सुनकर क्रोध से आग बबूला हो गया लेकिन वह मेहमानों से बात कर रहा था, इसलिए चुप रहा लेकिन गिलहरी अपनी बात बार-बार दोहराती रही । जब सब मेहमान चले गये तो राजा ने गिलहरी को खोजवाना शुरू किया लेकिन वह कहीं नहीं मिली। राजा रात भर सो नहीं सका ।

राजा नियम पूर्वक प्रतिदिन ग़रीबों को दान दिया करता था। प्रातः जब वह ग़रीबों को धन बाँट रहा था, गिलहरी फिर आ गई और चिल्लाने लगी कि राजा मेरी दौलत दान करके दानी बन रहा है । राजा ने अपने नौकरों को आदेश दिया कि वे गिलहरी को पकड़ लें, लेकिन गिलहरी पकड़ में कहाँ आने वाली थी । एक बार फिर राजा अपने गुस्से को पी गया ।

दोपहर में राजा खाना खाने बैठा तो उसने देखा कि गिलहरी से चिल्ला रही है - मेरी दौलत के bal पर राजा खाना खा रहा है । यह सुनकर राजा एक भी न खा सका, उसके नौकर गिलहरी को पकड़ने के लिए फिर दौड़े मगर गिलहरी हाथ न आयी ।         

उसी रात जब राजा खाने के लिए गया तो गिलहरी फिर आ धमकी और फिर चिल्लाने लगी कि राजा मेरे धन से खाना खा रहा है। बेबस होकर राजा ने सोने की मोहर निकाल कर गिलहरी के सामने फ़ेंक दी।  गिलहरी ने तुरंत अपनी मोहर उठा ली। वह चिल्लाने लगी मैं जीत गयी, मैं जीत गयी, राजा हार गया। वह सुन कर राजा पागलों की तरह गिलहरी के पीछे भागा लेकिन गिलहरी एक पल में गायब हो गयी।

उस रात भी राजा सारी रात नहीं सो सका। अगले दिन राजा ने अपने सैनिकों से कहा कि पूरे राज्य में एक-एक गिलहरी को पकड़ कर मार डाला जाये।

यह आज्ञा सुनकर मंत्री ने कहा राजन हमारे राज्य में लाखों गिलहरियाँ हैं हम कहाँ-कहाँ उन्हें ढूँढेंगे। फिर इस बात का पता कैसे चलेगा कि हमारे सैनिकों ने सभी गिलहरियों को मार दिया। फिर दूसरे राज्य की गिलहरियां भी तो हमारे राज्य में आ सकती हैं। इसलिए सैनिकों की असफलता पर आपको ज्यादा दुःख होगा।

हताश होकर राजा ने कहा कि अब हम क्या करें ? मंत्री ने कहा, बस उसकी बातों पर ध्यान न दें।

थोड़ी देर बाद गिलहरी फिर आई और कहने लगी कि डर के मारे राजा ने मेरा धन लौटा दिया' ।

इस बार राजा कपकअप सुनता रहा। गिलहरी यह देखकर हैरान हो गयी। फिर बिना कुछ कहे ऐसी भागी कि फिर कभी अपनी सूरत नहीं दिखाई।

 

 

प्रश्न

१ - राजा किस बात के लिये दडिंग हाँकता था ?

२ - मंत्री ने राजा से क्या कहा ?

३ - गिलहरी के पंजे में क्या था ?

४ - राजा गिलहरी पर आग बबूला क्यों हुआ ?

५ - गिलहरी से बचने के लिये राजा ने क्या उपाय किया ?