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चोर की दाढ़ी  

किसी शहर में मोहन नाम का एक लड़का रहता था। उसके बचपन में ही उसके पिता का स्वर्गवास हो गया था। वह अपनी माँ और बहन के साथ एक झोंपड़ी में रहता था। वह बहुत मेहनती था। पढ़ाई के बाद वह जूता पालिश करके अपने परिवार का खर्च चलाता था।

एक दिन जब वह अपनी दिन भर की कमाई गिन रहा था, उसने एक व्यक्ति को यह कहते सुना कि एक चोर सुनार की दूकान से चोरी करके भागा है।

मोहन ने उस आदमी से पूछा, कब ? कहाँ ? बस अभी। चोर ने सोने का हार चुराया और भाग गया, लोग बता रहे थे कि चोर की दाढ़ी भी थी।

उस आदमी ने कहा।

इतने में मोहन के पास एक ग्राहक आ गया। उसने कहा, मेरे जूतेपर पालिश कर दो बढ़िया पालिश करना। मुझे कोई जल्दी नहीं है। ग्राहक सूटेड-बूटेड था।  काफी अमीर लगता था।

मोहन तुरंत पालिश पालिश करने लगा मगर उसका मन चोरी की घटना में ही लगा हुआ था।

मोहन ने थोड़ी ही देर में ग्राहक का जूता चमका दिया। तभी मोहन ने देखा कि दो सिपाही आ रहे हैं। वह उनसे चोर के विषय में पूछता चाहता था लेकिन ग्राहक का गरम मिजाज देखकर चुप रहा।

इतने में ग्राहक ने कहा - लड़के, ठीक से जूता चमकाओ, तुम्हारा ध्यान कहाँ है ? मोहन डर गया उसने सोचा, हो सकता है यह कोई बड़ा आदमी हो। कहीं पुलिस से मेरी शिकायत न कर दे।

उसने पूरा ध्यान फिर से पालिश में लगा दिया। हुजूर, दूसरा पाँव ऊपर रखिये।

उस आदमी ने दूसरा पाँव पालिश स्टैंड पर रख दिया।

ओ, लड़के जल्दी करो, मेरे पास केवल एक मिनट का समय है।

अजीब आदमी है, अभी कह रहा था कि मुझे कोई जल्दी नहीं है, अब कह रहा है कि मेरे पास समय नहीं है।  मोहन ने सोचा।

वह फिर जूते को कपड़े से चमकाने लगा। इतने में उसने देखा कि जूते में से कुछ दिखाई दे रहा है। क्या चीज हो सकती है ? उसने ध्यान से देखा। "अरे" ----

बस मेरा समय हो गया। आदमी ने पाँव स्टैंड से हटाते हुये कहा। मोहन फिर भी जूते को चमकाता रहा।  आदमी पैसा निकालने लगा।

मोहन ने चुपचाप दोनों जूतों के फीते आपस में बाँध दिये और उठ खड़ा हुआ। उसने पैसे भी नहीं लिये।

वह दौड़ कर सिपाहियों के पास पहुंचा।

उसने अपने पीछे उस आदमी को चिल्लाते सूना, अरे लड़के ठहर। आदमी ने जब चलना चलना साहा तो वह मुँह के बल गिर पड़ा। वह उठने की कोशिश कर रहा था, इतने में मोहन सिपाहियों को लेकर आ गया। सिपाहियों ने उस आदमी को पकड़ लिया क्योंकि वही चोर था। सोने का हार उसके जूते में से निकला तथा जेब से नकली दाढ़ी मिली। पुलिस उसे थाने ले गयी।

मोहन की बहुत तारीफ हुई। पुलिस तथा सुनार दोनों ने उसे इनाम दिया। उसे स्कूल से भी इनाम मिला।

 

 

प्रश्न

१- मोहन अपनी पढ़ाई के बाद क्या करता था ?

२- उसने राहगीर को क्या कहते सुना ?

३- ग्राहक ने उससे क्या कहा ?

४- मोहन ने चोर को कैसे पकड़वाया ?

५- इस कहानी से तुमने क्या शिक्षा ली ?